गोवंश की रक्षा को लेकर समय-समय पर विभिन्न गौ रक्षा संगठनों की ओर से गोष्ठियां, बैठकें और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती हैं। तस्वीर आइडियल इंडिया के पत्रकार दिलशाद खान द्वारा सजाई की गई है l इन आयोजनों में संगठन के पदाधिकारियों द्वारा गोवंश की सुरक्षा और संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बताते हुए सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश को सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने तथा घायल पशुओं का उपचार कराने के दावे किए जाते हैं।
इसके बावजूद देहरादून के कई इलाकों में जमीनी स्थिति इन दावों से अलग नजर आ रही है। शिमला बाईपास और प्रेमनगर क्षेत्र समेत शहर के कई हिस्सों में गाय और अन्य गोवंश सड़कों पर आवारा घूमते दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर गोवंश सड़क किनारे और मुख्य मार्गों के बीच बैठा रहता है, जिससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर घूमने वाले इन पशुओं की नियमित देखरेख करने वाला कोई नजर नहीं आता। कई बार पशु घायल अवस्था में भी सड़कों पर पड़े दिखाई देते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, उपचार और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौ रक्षा संगठनों के पदाधिकारी अक्सर यह दावा करते हैं कि सड़कों पर भटक रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं तक पहुंचाया जाएगा। घायल गोवंश के उपचार की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही जाती है। लेकिन शहर के विभिन्न हिस्सों में लगातार सड़कों पर घूमता गोवंश इन दावों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ी चिंता सड़क सुरक्षा को लेकर है। मुख्य मार्गों पर अचानक सामने आ जाने या सड़क के बीच बैठने वाले गोवंश के कारण वाहन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। दुर्घटना की स्थिति में वाहन सवारों के साथ-साथ स्वयं गाय और अन्य गोवंश भी गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि गोवंश संरक्षण के नाम पर बड़े-बड़े पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे गौ रक्षा संगठनों के पदाधिकारी आखिर सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंश की सुध कब लेंगे? क्या इन पशुओं को सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने और घायल गोवंश के उपचार के लिए कोई ठोस व्यवस्था की जाएगी?
जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभागों के साथ गौ रक्षा संगठन भी केवल गोष्ठियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित न रहकर धरातल पर सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि सड़कों पर भटक रहे गोवंश को सुरक्षा मिल सके और आम लोगों को भी दुर्घटनाओं के खतरे से राहत मिल सके।
