देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में पहुंचे प्राथमिक शिक्षकों ने शनिवार को अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर राजधानी देहरादून में प्रदर्शन किया। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों ने परेड ग्राउंड में एकत्र होकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें उठाईं। इसके बाद रैली निकालकर मुख्यमंत्री आवास कूच किया। न्यू कैंट रोड पर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग लगाकर रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
शनिवार सुबह प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शिक्षक देहरादून के परेड ग्राउंड पहुंचे। यहां आयोजित सभा में उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने शिक्षकों को संबोधित किया और अपनी मांगों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। प्रदर्शन के चलते परेड ग्राउंड के आसपास काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा।

कूच के दौरान आंदोलनकारी शिक्षक जैसे ही न्यू कैंट रोड पहुंचे, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे नाराज शिक्षक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
प्राथमिक शिक्षक संघ चमोली के जिलाध्यक्ष दिगंबर नेगी ने कहा कि प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य संवारने के लिए शिक्षक दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन आज उन्हें अपनी मांगों को मनवाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की समस्याओं और उनकी आवाज को अपेक्षित गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है।
वहीं, जिलाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक धर्मेंद्र रावत ने कहा कि कर्मचारी सरकार की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने से लेकर विभिन्न जिम्मेदारियों के निर्वहन तक कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होना चिंता का विषय है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने री-एग्जाम प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियुक्ति के समय निर्धारित मानकों और नियमों के तहत चयनित शिक्षकों को दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।
शिक्षकों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनकी नौ सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनके हित में उचित कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर न होना पड़े।
रिपोर्टर राजू ठाकुर
