उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत पंजीकरण में एक प्रतिशत से भी कम मामलों में इसकी जरूरत पड़ेगी। जिन समाज में प्रतिषिद्ध श्रेणी के रिश्तों में विवाह होता है, वे भी धर्म गुरुओं के प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसी के पंजीकरण को रोकने की जगह उसे पंजीकरण में सहायता प्रदान करना है।