प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर देहरादून के छोटे एवं मझोले व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। डिस्ट्रिब्यूटर्स ऑफ उत्तराखंड (रजि.) एवं डिस्ट्रिब्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन सोसाइटी की ओर से नगर निगम के मेयर को ज्ञापन सौंपकर छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और व्यापारियों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि वे प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ सरकार की मुहिम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूर्णतः सहमत हैं। उनका कहना है कि प्रतिबंधित पॉलीथिन किसी छोटे दुकानदार द्वारा निर्मित नहीं की जाती, बल्कि यह पूरी आपूर्ति श्रृंखला से होकर बाजार तक पहुंचती है। इसके बावजूद कार्रवाई का मुख्य भार अक्सर श्रृंखला की अंतिम कड़ी यानी छोटे एवं मझोले दुकानदारों तथा रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ता है।
व्यापारियों ने कहा कि त्योहारों के दौरान विशेष अभियानों में भारी मात्रा में चालान किए जाने से छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध नियमों या कार्रवाई से नहीं, बल्कि एकतरफा एवं असमान कार्रवाई से है। ज्ञापन में नगर निगम से मांग की गई है कि कार्रवाई केवल अंतिम स्तर के दुकानदारों तक सीमित न रखकर प्रतिबंधित पॉलीथिन के वास्तविक स्रोत, निर्माता, थोक विक्रेता और आपूर्ति श्रृंखला की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई की जाए। व्यापारियों ने कहा कि यदि इस व्यवस्था की प्रत्येक कड़ी पर कार्रवाई की जाए तो समस्या का वास्तविक समाधान संभव है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि छोटे एवं मझोले व्यापारियों तथा रेहड़ी-पटरी वालों का अनावश्यक उत्पीड़न जारी रहा तो व्यापारिक वर्ग में रोष और असंतोष और बढ़ सकता है। व्यापारियों ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” तभी सार्थक होगा, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े छोटे व्यापारी को भी नियमों के साथ न्याय और समानता मिले।