देहरादून। शहर के कई इलाकों में जल संस्थान द्वारा पानी की पाइपलाइन डालने के लिए की जा रही खुदाई अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। सड़कों की खुदाई के बाद कई स्थानों पर मरम्मत का कार्य या तो अधूरा है या फिर महज खानापूर्ति के तौर पर किया गया है। इसके चलते सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे, धूल और मिट्टी दिखाई दे रही है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर बदहाल सदके त्योहार की चमक फीकी कर सकती है।
जिलाधिकारी देहरादून द्वारा शहर की सड़कों को 15 अक्टूबर तक गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य मार्गों पर इन निर्देशों का असर दिखाई देने के बावजूद शहर के कई वार्डों की आंतरिक सड़कों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इस खुदाई ने स्थानीय पार्षदों की मुश्किल भी बढ़ा दी है, जिस कारण स्थानीय पार्षदों को जनता के सवालों का जवाब देना मुश्किल भरा हो सकता है । स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्डों की सड़कें पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी हैं और उन पर यातायात का दबाव रहता है। ऐसे में पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की समुचित मरम्मत न होने से परेशानी और बढ़ गई है।
नेहरू कॉलोनी, चंद्रनगर, भंडारी बाग क्षेत्र में शिवराम स्कूल के समीप, सहारनपुर चौक के पास मातावाला सहित कई स्थानों पर सड़क की खुदाई के बाद गड्ढे और आधी अधूरी मरम्मत के बाद धूल के बवंडर नजर आ रहे हैं। कुछ स्थानों पर पैचिंग की गई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का आरोप है कि कई जगह मरम्मत का काम अधूरा या नाममात्र का है। खुदाई के कारण उड़ने वाली धूल से भी आसपास के लोगों और राहगीरों को परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब जिलाधिकारी ने शहर की सड़कों को निर्धारित समय सीमा में गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा आंतरिक वार्डों की सड़कों की मरम्मत को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या विभाग और विभाग के अधिकारी जिला अधिकारी महोदय के आदेशों को भी ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी करेंगे।
