देहरादून के प्रसिद्ध वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में प्रवेश शुल्क में लगातार की गई बढ़ोतरी को लेकर पर्यटकों, छात्रों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। एक समय ऐसा था जब एफआरआई परिसर में प्रवेश के लिए मात्र 15 रुपये शुल्क लिया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 25 रुपये किया गया। अब संस्थान प्रशासन द्वारा प्रवेश शुल्क को बढ़ाकर 100 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एफआरआई केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, शैक्षणिक और प्राकृतिक धरोहर भी है, जहां बड़ी संख्या में छात्र, शोधार्थी और पर्यटक प्रतिदिन पहुंचते हैं। प्रवेश शुल्क में अचानक चार गुना वृद्धि होने से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
नागरिकों का कहना है कि पहले कम शुल्क होने के कारण परिवार और छात्र आसानी से एफआरआई का भ्रमण कर लेते थे, लेकिन अब 100 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क होने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यहां आना महंगा साबित होगा। कई लोगों ने शुल्क वृद्धि पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
पर्यटन एवं पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि एफआरआई जैसे संस्थानों का उद्देश्य लोगों को वन संरक्षण, पर्यावरण और शोध गतिविधियों से जोड़ना है। ऐसे में अत्यधिक प्रवेश शुल्क लोगों की पहुंच को सीमित कर सकता है।
शहरवासियों ने केंद्र एवं संस्थान प्रशासन से मांग की है कि छात्रों, स्थानीय निवासियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायती दरें निर्धारित की जाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक संस्थान का लाभ उठा सकें।