यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के लिए लगाए गए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। तकनीकी खामी और विभागीय लापरवाही के चलते एक 77 वर्षीय बुजुर्ग के नाम ई-चालान जारी कर दिया गया, जबकि संबंधित वाहन उस समय उनके घर पर खड़ा था।
जानकारी के अनुसार प्रेमनगर निवासी 77 वर्षीय जगदंबा प्रसाद मिश्रा, जो रोडवेज से सेवानिवृत्त हैं, को उनके मोबाइल पर बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने का ई-चालान प्राप्त हुआ। चालान की सूचना मिलने के बाद वह और उनका परिवार हैरान रह गया। जब चालान के साथ संलग्न फोटो को देखा गया तो उसमें एक युवक और युवती स्कूटी पर सवार दिखाई दे रहे थे।
मिश्रा के अनुसार उनकी स्कूटी का पंजीकरण नंबर UK07F
L 6265 है। वहीं जिस स्कूटी का चालान काटा जाना था उसका पंजीकरण संख्या UK07F N6265 है l दोनों स्कूटी के नंबर प्लेट को ध्यान से देखा जाए तो केवल N और L का अंतर है l मिश्रा के अनुसार वाहन का मॉडल, बनावट और क्षमता उनकी स्कूटी से मेल नहीं खाती। उनका कहना है कि उनकी स्कूटी 110 सीसी की है, और जिस स्कूटी का चालान काटा जाना था वह स्कूटी 125 सीसी मॉडल की प्रतीत हो रही है।
चालान की फोटो में स्पष्ट रूप से एक युवक और युवती स्कूटी पर सवार दिखाई दे रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले वास्तविक वाहन की पहचान कर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन तकनीकी त्रुटि और सत्यापन में लापरवाही के कारण निर्दोष बुजुर्ग को चालान थमा दिया गया।
यह मामला परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और ANPR कैमरा संचालन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नंबर प्लेट पढ़ने के आधार पर चालान जारी नहीं किया जाना चाहिए। वाहन के मॉडल, रंग, कंपनी, सीसी क्षमता और अन्य विवरणों का मिलान भी आवश्यक है। यदि फोटो में दिख रहा वाहन पंजीकृत वाहन से अलग है, तो चालान जारी होने से पहले ही त्रुटि पकड़ ली जानी चाहिए थी।
मिश्रा का कहना है कि यदि कैमरे से नंबर पढ़ने में गलती हुई थी तो संबंधित अधिकारियों द्वारा फोटो का मानवीय सत्यापन किया जाना चाहिए था। बिना जांच-पड़ताल के चालान जारी होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। इस लापरवाही के कारण उनको अपना चालान निरस्त करवाने के लिए विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बावजूद इसके अभी तक उनका चालान निरस्त नहीं हुआ है l उनका चालान अभी तक निरस्त न होना यह विभाग की ओर भी बड़ी लापरवाही हैl इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही ANPR सिस्टम से जारी होने वाले चालानों के लिए दो-स्तरीय सत्यापन व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष व्यक्ति को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। उल्लेखनीय है कि फोटो में दिखाई दे रहे वाहन पर दो लोग सवार हैं और उसी वाहन का चालान होना चाहिए था l