देशभर में चल रहे जनगणना 2027 के कार्य को लेकर जनगणना निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। निदेशालय द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करने, गलत जानकारी देने, अधिकारियों से दुर्व्यवहार करने अथवा सहयोग न करने वाले लोगों के खिलाफ जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
के अनुसार वर्तमान में जनगणना 2027 का कार्य तेजी से चल रहा है और इसके लिए नियुक्त अधिकारी एवं कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े एकत्रित कर रहे हैं। लेकिन कई स्थानों पर जनगणना कर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग सही जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं, जबकि कई मामलों में अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया जा रहा है। यहां तक कि कुछ घटनाओं में जनगणना कर्मचारियों पर कुत्ते छोड़ने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
जनगणना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनगणना केवल आंकड़ों का कार्य नहीं, बल्कि देश की विकास योजनाओं की आधारशिला है। जनगणना के माध्यम से ही सरकार को यह जानकारी मिलती है कि देश की कुल आबादी कितनी है, किस क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है तथा किन क्षेत्रों में विकास कार्यों की अधिक आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि जनता सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराएगी तो सरकार के लिए योजनाओं का सही निर्धारण करना कठिन हो जाएगा। यही आंकड़े तय करते हैं कि किस राज्य और क्षेत्र को कितना बजट आवंटित किया जाना है तथा किन स्थानों पर नई योजनाएं लागू करनी हैं।
जनगणना निदेशालय ने आम जनता से अपील की है कि वे जनगणना अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सम्मान करें, उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराएं और राष्ट्रहित के इस महत्वपूर्ण कार्य में पूर्ण सहयोग दें, ताकि देश के विकास की योजनाएं सही और सटीक आंकड़ों के आधार पर बनाई जा सकें।