एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सूर्य गृहः मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य अनुदान (State Subaldy) को 31 मार्च 2025 से प्रभावी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है।
जैसा कि आप अवगत हैं, इस प्रकार की जानकारी के कारण योजना के अंतर्गत कार्यरत पंजीकृत विक्रेताओं, उपभोक्ताओं एवं अन्य संबंधित हितधारकों के मध्य भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
राज्य सरकार द्वारा 31 मार्च 2025 से राज्य सब्सिडी समाप्त किए जाने के संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
1. क्या यह निर्णय केवल 31 मार्च 2025 के बाद प्राप्त होने वाले नए आवेदन पर लागू होगा या वर्तमान में प्रक्रियाधीन/स्वीकृत आवेदनों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा?
2. उन उपभोक्ताओं एवं विक्रेताओं के लिए क्या कोई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं जिनके आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं या जिनकी स्थापना कार्य प्रगति पर है?
3. क्या सरकार की और से सभी हितधारकों को स्पष्टता प्रदान करने हेतु कोई औपचारिक सूचना मा परामर्श जारी
4. १ अप्रैल २०२५ के बाद लगभग २००० नए पंजीकरण के संदर्भ में भारी असमंज की स्थिति उत्पन्न हो गई है, क्या इन उपभोक्ताओं को राज्य सरकार का लाभ प्राप्त होगा या नहीं, विभाग एवं शासन यथाशीघ्र स्थिति को स्पष्ट करे।
भारत के प्रधानमंत्री, द्वारा शुरू की गई पीएम सूर्य घर योजना के प्रभाव उत्तराखंड में राज्य सब्सिडी बंद होने के बाद:
राज्य सब्सिडी के बंद होने से योजना के लक्ष्यों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। सब्सिडी के बिना, सौर ऊर्जा संयंत्रों को अपनाने की गति धीमी हो सकती है, क्योंकि निवासियों के लिए शुरुआती लागत अधिक हो जाएगी।
यह राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को बाधित कर सकता है और दीर्घकालिक बचत में कमी ला सकता है, जिसमें 2027 तक 40,000 छत सौर ऊर्जा संयंत्रों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य शामिल है।। इसके अलावा, सौर ऊर्जा अपनाने में कमी से पर्यावरणीय लाभ और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों पर असर पड़ सकता है।
उत्तराखंड में सौर राज्य सब्सिडी के बंद होने से कई वित्तीय प्रभाव हो सकते हैं:
निवासियों के लिए बढ़ी हुई लागतः सब्सिडी के बिना, सौर पैनल स्थापित करने की शुरुआती लागत बढ़ जाएगी।
सौर ऊर्जा अपनाने में कमी: उच्च तागत सौर ऊर्जा संयंत्रों की वृद्धि को धीमा कर सकती है, जिससे राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर असर पड़ेगा और निवासियों के दीर्घकालिक बचत में कमी हो सकती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभावः सौर पैनल निर्माण, स्थापना और रखरखाव से जुड़ी उद्योगों की मांग में कमी आ सकती है, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
जैसा कि ज्ञात हो, राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी बंद करने के पीछे राज्य के कोश में पड़ने वाले आर्थिक बोझ का विभाग और प्रशासन द्वारा हवाला दिया जा रहा है।
प्रेस वार्ता में रेडा अध्यक्ष अतुल बलूनी, महासचिव आलोक बहुगुणा, लावण्या सिंघल, सत्री कश्यप, धर्मेंद्र नेगी हरेंद्र मेहरा, गौरव कपिल, मंगलेमा चमोती, सत्येंद्र सिंह, अंकित चौधरी, शेखर सतीजा, रूपक अग्रवाल, ब्रह्मपाल सिंह, शिवराना कोटि, आशीष धीमान एवं उत्तराखंड के विभिन क्षेत्रों में कार्यरत वेंडर्स शामिल रहे