ऊर्जा निगम में अप्रैल में तत्कालीन ईई काशीपुर ने एसई काशीपुर और निदेशक ऑपरेशन पर बिजली चोरी करने वालों को मदद करने और अनावश्यक दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगा कर सनसनी मचा दी थी।
इन गंभीर आरोपों के बावजूद यूपीसीएल मैनेजमेंट आज तक इस मामले में चुप्पी साधे बैठा है। दूसरी ओर निदेशक ऑपरेशन ईई का जवाब तलब करने के साथ ही ईई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर चुके हैं।
अप्रैल 2024 में तत्कालीन ईई काशीपुर अजीत कुमार यादव ने निदेशक ऑपरेशन मदरराम आर्य पर मौखिक रूप से अवांछित दबाव बनाने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही नियमों की गलत व्याख्या करने और बिजली चोरी करने वालों को ईई के खिलाफ भड़काने तक का आरोप लगाया था।
अधिशासी निदेशक मानव संसाधन को कॉपी करते हुए पत्र में उच्च अफसर अनावश्यक दबाव बना कर उनका मानसिक शोषण करने का आरोप तक लगाया। इसके साथ ही एसई काशीपुर अनिल वर्मा को पत्र लिख आरोप लगाया था कि वे बिजली चोरी करने वाले का समर्थन करते हुए सिफारिश कर रहे हैं।
बिजली चोरी करने वालों से गुपचुप मुलाकात कर रहे हैं। विभागीय तथ्य बता कर केस को कमजोर कर रहे हैं। पत्र में एसई को बिजली चोरी करने वालों के प्रति सहयोग न करने की नसीहत तक दी गई।
इन आरोपों पर निदेशक मदनराम आर्य ने ईई का जवाब तलब किया। एसई की ओर से ईई पर कर्मचारी आचरण नियमावली के खिलाफ जाकर काम करने पर कार्रवाई की संस्तुति की।
ईई का व्यवहार कर्मचारी आचरण नियमावली के खिलाफ रहा। इस पर उनका जवाब तलब किया गया था। ईई की ओर से मौखिक रूप से माफी मांगी गई। पूरे प्रकरण से उच्च स्तर को अवगत करा दिया गया है।