पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच, रविवार को केदार धाम पहुंचे राहुल गांधी ने खुद तो राजनैतिक बयानों से परहेज किया ही उन्होंने समर्थकों को भी नारे लगाने से रोक दिया। यात्रा के दौरान पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेताओं से भी पूरी तरह दूरी बनाकर उन्होंने यात्रा को पूरी तरह धार्मिक रखने का प्रयास किया।
राहुल गांधी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब सात नवंबर को छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान हो रहा है। माना जा रहा था कि वो केदारनाथ आकर, कोई राजनैतिक संदेश दे सकते हैं।
लेकिन इसके विपरीत राहुल गांधी यात्रा के पहले दिन सियासत से दूर नजर आए। राहुल ने पूरे दिन किसी तरह की बयानबाजी नहीं की, उनके सोशल मीडिया एकाउंट पर भी धाम की फोटो के साथ सिर्फ इतना ही लिखा नजर आया ‘आज उत्तराखंड में केदारनाथ धाम की यात्रा कर दर्शन प्राप्त किए और आराधना की। हर हर महादेव’।
राहुल के धाम पहुंचने पर कुछ लोगों ने नारेबाजी की, कुछ ने इस दौरान राहुल गांधी तो कुछ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे लगाए। लेकिन राहुल ने समर्थकों को अपने समर्थन में नारे लगाने से रोक दिया।
उन्होंने यात्रा को पूरी तरह धार्मिक रखने के लिए पार्टी नेताओं से भी मिलने से परहेज किया। इस दौरान पार्टी के चुनिंदा नेता जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंचे भी तो उनकी राहुल से मुलाकात नहीं हो पाई। एक मात्र पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ही केदारनाथ में उनके साथ नजर आए। राहुल गांधी ने केदारनाथ यात्रा को केवल निजी रखा। इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक रंग देने से परहेज किया। इस बारे में उन्होंने न राजनीतिक नारे लगाए और किसी को लगाने दिया।