उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद बुधवार को देहरादून स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड सहित राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन पर प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है l प्रदेश के सभी राजकीय कार्यायलयों के राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे l
भुवन चंद्र खंडूरी 91 वर्ष के थे और पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए आवास पर रखा गया, जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, सैन्य अधिकारियों और आम नागरिकों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। अगले दिन 20 तारीख को उनके पार्थिव शरीर को प्रीतम रोड स्थित भाजपा कार्यालय में भी अंतिम दर्शन के लिए रखा गया वहां पर भी भारी संख्या में राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, सैन्य अधिकारियों और आम नागरिकों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। बीजेपी कार्यालय में बीजेपी की वरिष्ठ नेत्री डॉक्टर सुनीता बौड़ाई एवं कर्नल वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने भी भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया l
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को उत्तराखंड की राजनीति में एक ईमानदार, अनुशासित और विकास पुरुष के रूप में याद किया किया जाएगा। सेना में 37 वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और गढ़वाल लोकसभा सीट से कई बार सांसद चुने गए। केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में 108 आपातकालीन सेवा की भी शुरुआत की गई l
राजनीतिक जीवन में सादगी और कठोर प्रशासनिक छवि के कारण उन्हें “अनुशासन पुरुष” के नाम से भी जाना जाता था। उनके निधन पर मुख्यमंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं तथा सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड की अपूरणीय क्षति बताया है।
राज्यभर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में शोक का माहौल है। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया गया l उनके अंतिम संस्कार में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केंद्रीय मंत्री मोहनलाल खट्टर सहित तमाम बड़े राजनीतिक नेता शामिल रहेl