शहर के कन्वेंट रोड स्थित तुषार्थ वेडिंग प्वाइंट की प्रॉपर्टी में खड़ा एक वर्षों पुराना और विशाल पेड़ गुरुवार रात करीब 10:15 बजे अचानक गिर गया। शुक्रवार सुबह 6:30 बजे सूरज चौहान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पेड़ गिरने से सूरज चौहान और उनके परिवार कि जान बाल बाल बची l सूरज चौहान के आवास के टीन शेड वाला स्टोर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि पेड़ का एक हिस्सा बगल में स्थित सेवायोजन कार्यालय (Employment Office) की छत पर जा टिका। गनीमत रही कि हादसे के समय सूरज चौहान के परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
मीडिया से बातचीत में सूरज चौहान ने बताया कि यह पेड़ काफी पुराना और लंबे समय से खतरे का कारण बना हुआ था। इस संबंध में वह पहले भी जिलाधिकारी एवं प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) से वार्ता कर चुके हैं l उनका कहना है कि पेड़ को कटवाने के लिए उन्होंने सरकारी स्तर पर कार्रवाई भी कराई, लेकिन वर्ष 2014 से लेकर अब तक करीब 12 वर्षों का लंबा समय बीत जाने के बावजूद पेड़ का कटान नहीं हो सका।
सूरज चौहान के मुताबिक, वन विभाग की ओर से उन्हें बताया गया था कि तुषार्थ वेडिंग प्वाइंट के स्वामी की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दिए जाने के बाद ही पेड़ काटने की कार्रवाई की जाएगी। सूरज चौहान का आरोप है कि वर्ष 2014 से अब तक विभाग वेडिंग प्वाइंट के स्वामी से अनापत्ति प्रमाण पत्र तक प्राप्त नहीं कर सका। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए सवाल उठाया कि जब पेड़ से संभावित खतरे की जानकारी पहले से विभाग विभाग को दे दी गई थी तो इतने वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
हादसे के दौरान सेवायोजन कार्यालय के चौकीदार लोचन भी घटनास्थल के नजदीक मौजूद थे। उन्होंने बताया कि जिस समय पेड़ गिरा, वह उसी स्थान के आसपास थे। अचानक पेड़ गिरने से वह भी सकते में आ गए। उसका कहना है कि यह उनकी किस्मत थी कि वह पेड़ की चपेट में आने से बच गए, वरना उसकी जान भी जा सकती थी।
सूरज चौहान ने कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण आज उनकी संपत्ति को नुकसान हुआ है l इससे किसी की जान भी जा सकती थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार विकास एवं फ्लाईओवर निर्माण के नाम पर लाखों पेड़ों के कटान की अनुमति देती है, लेकिन जब किसी ऐसे पेड़ को काटने की बात आती है, जिससे जान-माल का खतरा पहले से सामने हो, तो कार्रवाई में वर्षों लग जाते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था? यदि वर्ष 2014 से ही इस पेड़ को संभावित खतरे के रूप में चिन्हित किया गया था, तो संबंधित विभाग ने समय रहते पेड़ का निस्तारण क्यों नहीं कराया? इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। सूरज चौहान ने जिलाधिकारी महोदय एवं वन विभाग से अपने नुकसान का मुआवजा मांगा है साथ ही जिलाधिकारी महोदय से वन विभाग के अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की मांग भी की है l