पेयजल निगम के चार अधिशासी अभियंताओं की 19 साल बाद सेवाएं समाप्त करने का फैसला विवादों में आ गया है। 2022 में पेयजल निगम के मुख्य महाप्रबंधक सुभाष चंद्र ने जांच में नियुक्ति को सही ठहराते हुए चयन समिति की गलती मानकर दंड न देने की सिफारिश की थी।उधर, चयन समिति के एक सदस्य ने नियुक्ति पर अपनी गलती स्वीकार की। बावजूद इसके चयन समिति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दरअसल, पेयजल निगम में अधिशासी अभियंताओं ने दूसरे राज्य के निवासी होने के बावजूद उत्तराखंड में आरक्षित पदों पर नियुक्ति पा ली थी। इसकी शिकायत होने के बाद 2022 में मुख्य अभियंता सुभाष चंद्र ने जांच की थी। जांच में उन्होंने स्पष्ट किया था कि अभियंताओं ने नियुक्ति के दौरान प्रमाणपत्र संबंधी कोई भी तथ्य नहीं छिपाया।
नियुक्ति करने वाली समिति को नोटिस
सभी प्रमाण पत्र होने के बावजूद चयन समिति ने ये निर्णय किस आधार पर लिया, पता नहीं चल पाया। उन्होंने कहा था कि चूंकि विभाग में उन्होंने कोई भी भ्रामक, असत्य अभिलेख या प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया था, इसलिए आरक्षण का लाभ लेने के लिए कोई छल-कपट प्रतीत नहीं होता। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि इस आधार पर इन अभियंताओं को सीधे दोषी ठहराना व दंड देना न्यायोचित नहीं होगा।
सभी प्रमाण पत्र होने के बावजूद चयन समिति ने ये निर्णय किस आधार पर लिया, पता नहीं चल पाया। उन्होंने कहा था कि चूंकि विभाग में उन्होंने कोई भी भ्रामक, असत्य अभिलेख या प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया था, इसलिए आरक्षण का लाभ लेने के लिए कोई छल-कपट प्रतीत नहीं होता। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि इस आधार पर इन अभियंताओं को सीधे दोषी ठहराना व दंड देना न्यायोचित नहीं होगा।
पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने सेवा समाप्ति का जो आदेश जारी किया है, उसमें भी स्पष्ट कहा गया है कि नियुक्ति करने वाली समिति को नोटिस जारी किया गया था लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। केवल एक सदस्य ने जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उस वक्त उन्हें शासन के आदेशों का संज्ञान नहीं था। इस वजह से त्रुटिवश नियुक्ति की संस्तुति दी गई।
कार्मिक विभाग ने भी माना, चयन समिति ने प्रक्रिया की दूषित