नैनीताल हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के राजकीय मेडिकल कॉलेज में कार्यरत सहायक प्रोफेसर रुद्रेश नेगी की बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में रिक्त पद के लिए आवेदन करने के लिए प्रिंसिपल से मांगी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।न्यायालय ने कहा कि यदि नियोक्ता को किसी कर्मचारी के अन्यत्र रोजगार मांगने पर आपत्ति है, तो नियोक्ता के पास एनओसी देने से इनकार करने का अधिकार है। न्यायालय ने यह भी देखा कि उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य होने के कारण अपने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों की कमी का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों की अपेक्षित संख्या के संबंध में न्यूनतम मानक स्थापित किए हैं।
इन निर्धारित मानकों को पूरा नहीं होने के परिणामस्वरूप कॉलेज की मान्यता समाप्त हो सकती है। इस तरह के नुकसान के विनाशकारी परिणाम होंगे। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज तिवारी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सरकारी अधिवक्ता ने इस बात पर जोर दिया गया कि यदि कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज शिक्षकों की न्यूनतम संख्या से संबंधित मानदंडों का पालन न करने के कारण मान्यता खो देता है, तो सार्वजनिक धन की एक महत्वपूर्ण राशि बर्बाद हो जाएगी
जब याचिकाकर्ता नेगी ने एनओसी के लिए आवेदन किया, तो प्रिंसिपल ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक से निर्देश मांगे, जिन्होंने उन्हें 2020 में जारी एक सरकारी आदेश के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया। जीओ के अनुसार, प्रिंसिपल को सरकारी मेडिकल कॉलेज के शिक्षक को एनओसी जारी करनी चाहिए, यदि शिक्षक ने राज्य के भीतर किसी अन्य कॉलेज में नियुक्ति के लिए आवेदन किया है। नेगी के मामले में, राज्य के बाहर रोजगार के लिए एनओसी मांगी गई थी। याचिका में आदेश और निर्देश को रद करने और विभाग से एनओसी जारी करने की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका दायर कि थी।