धर्मनगरी हरिद्वार में दस जुलाई से शुरू हुआ कांवड़ मेले आज 22 जुलाई को सकुशल संपन्न हो गया है. आधी रात तक सभी कांवड़िए अपने गंतव्य की तरफ रवाना हो चुके होगे. जिला प्रशासन के अनुसार अभी तक चार करोड़ 13 लाख से ज्यादा कांवड़ियों हरिद्वार से गंगाजल भरकर अपने शिवालयों की तरफ निकल चुके है. अब भी कांवड़ियों के आने के सिलसिला जारी है. इसीलिए ये आंकड़ा पांच करोड़ तक जाने की उम्मीद है.
हरिद्वार पुलिस-प्रशासन के लिए कांवड़ मेले के 13 दिन बड़े ही चुनौती भरे रहे हैं. कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए पुलिस को समय-समय पर अपनी रणनीति बदलनी पड़ी थी. ट्रैफिक प्लान भी कई बार चेंज किया गया. आखिर के चार दिन तो पूरा हरिद्वार भगवा मय हो रखा था. रोजाना से 30 से 40 लाख शिव भक्त हरिद्वार पहुंच रहे थे.
कांवड़ मेले के दौरान पुलिस-प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती उपद्रवियों से निपटने की होती है. क्योंकि कई बार कांवड़ियों के भेष में कुछ लोग मेले का माहौल खराब करने की कोशिश करते है. हालांकि इस बार पुलिस की सख्ती की वजह से बीते सालों के मुकाबले इस तरह की घटनाएं कम देखने को मिली है. वहीं जिन लोगों ने इस बार उपद्रव मचाया था, उन्हें पुलिस ने सबक भी सिखाया है. उपद्रव मचाने के आरोप में कई कांवड़ियों को तो पुलिस ने जेल की हवा भी खिलाई है.
मेले के आखिरी चरण में डाक कांवड़िए हरिद्वार पहुंचते हैं. इस दौरान बड़े वाहनों की वजह से आम जनता के साथ-साथ पैदल चलने वाले कांवड़ियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं. लेकिन इस बार पुलिस ने इस समस्या को बड़े अच्छे से मैनेज किया.
पुलिस ने कांवड़ियों के किसी भी बड़े वाहनों की हरिद्वार मुख्य शहर में एंट्री नहीं होने दी. सभी बड़े वाहनों की पार्किंग का इंतजाम रिद्वार शहर की सीमा के बाहर ही किया गया था, जिससे सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रही. इसके अलावा अन्य कांवड़ियों को भी पुलिस ने इस बार हाईवे से नहीं चलने दिया. सभी कांवड़ियों को कांवड़ पटरी से ही भेजा गया.
इस बार पंचक में भी कांवड़िए गंगा जलकर भरकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते रहे. पहले के मुकाबले कांवड़ियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने भी उतने ही अच्छे तरीके से इस मेले को मैनेज किया है. आज रात तक सभी कांवड़िए हरिद्वार से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो जाएगे.