गोपनीय जांच में कुमाऊं कमिश्नर रावत को पता चला कि फैजान मिकरानी नाम का व्यक्ति फर्जी दस्तावेज बनाने का काम करता है. इसके बाद गुरुवार 13 नवंबर देर शाम को कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित सीएससी सेंटर में पहुंचे. कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के सीएससी सेंटर में पहुंचते ही हड़कंप मच गया.
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की जांच में सामने आया कि फैजान मिकरानी ही फर्जी दस्तावेज़ बनाता है, जो हल्द्वानी तहसील में अर्ज़ीनवीस का काम करता है. कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सीएससी सेंटर से कई लोगों के पर्सनल दस्तावेज भी मिले है.
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने बताया कि जनता दरबार में उनके सामने एक शिकायत आई थी. जिसमें बताया गया था कि रईस अहमद नाम का व्यक्ति जो यूपी के बरेली का रहने वाला है, वो कुछ समय से हल्द्वानी में रह रहा है, लेकिन उसका स्थायी निवास प्रमाण पत्र बन गया है. बरेली वाले रईस अहमद का स्थायी निवास बनाने के लिए हल्द्वानी के ही एक रईस अहमद नाम के व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिसके पास पहले से ही स्थायी निवास का प्रमाण पत्र है.
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के अनुसार मामले की जांच की गई तो फैजान मिकरानी का नाम सामने आया है, जो हल्द्वानी तहसील में अर्ज़ीनवीस का काम करता है. फैजान मिकरानी के पास कोई व्यक्ति आय प्रमाण पत्र बनवाने गए थे, उसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर फैजान मिकरानी ने इस्तेमाल किया. यानी फैजान मिकरानी ने आय प्रमाण पत्र बनवाने वाले व्यक्ति के मोबाइल नंबर से आवेदन कर दो नकली स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिए. वहीं जब सीएससी सेंटर में छापा मारा गया तो वहां पर कई व्यक्तियों के पर्सनल दस्तावेज भी पाए गए, जो नहीं होने चाहिए थे.
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने बताया कि इस मामले में अभी तहसील की तरफ से मुकदमा दर्ज जाएगा. इस तरह के और कितने मामले है, उनका पता लगाने के लिए विस्तृत जांच भी करायी जाएगी. उत्तराखंड में इस तरह का अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाए. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तरफ से इसको लेकर साफ निर्देश दिए गए है.