उत्तराखंड की अधिकांश जेलों में क्षमता से तीन गुना कैदी, इंतजार में सिस्टम फेल

बेल…बरी या मिलेगी सजा! इस सवाल के इंतजार में उत्तराखंड की जेलों में कैदियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। इस कारण देवभूमि की अधिकांश जेलों में आज क्षमता से तीन गुना ज्यादा कैदी बंद हैं। एक आरटीआई के जरिए 11 जेलों से जो आंकड़े मिले हैं, उनमें नौ जेलों से ऐसा ही चौंकाने वाला हाल सामने आया है।सबसे बुरा हाल तो हल्द्वानी और देहरादून जेलों का है, जहां कैदियों की क्षमता तो क्रमश: 635 और 580 है, लेकिन वहां दोगुने से भी ज्यादा कैदी ठूंसे गए हैं। मौजूदा समय में हल्द्वानी जेल में 1450 और देहरादून जेल में 1276 बंदी हैं।

विचाराधीन कैदियों ने बिगाड़ा सिस्टम

जेलों से मिले आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि जेलों के ठसाठस भरने के पीछे की मुख्य वजह विचाराधीन कैदी हैं। दूसरी तरह से समझें तो जैसे-जैसे अपराध बढ़ रहे हैं या कहें अपराधियों के हौसले, वैसे-वैसे अपराधों में शामिल होने वाले आरोपियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिनके मामलों में या तो सुनवाई (ट्रायल) विचाराधीन है या फिर आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल होने का इंतजार है। इसलिए इन्हें कानून की भाषा में विचाराधीन कैदी कहा जाता है।

जेलें फुल हो जाएं मगर समाज का दम नहीं फूलना चाहिए

इनमें अधिकांश जमानत मिलने के इंतजार में जेल में बंद हैं। यह अलग बात है कि जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मानते हैं कि भले जेलों का दम एक बार को फूल जाए, पर अपराध में लिप्त आरोपियों के आसानी से बाहर आने से समाज का दम नहीं फूलना चाहिए। इसलिए ज्यादातर मामलों में पुलिस उन्हें जमानत दिए जाने का विरोध करती है। अदालतों में पुलिस का यही तर्क रहता है कि विचाराधीन कैदी को यदि जमानत दी गई तो वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है या फिर अपराध में लिप्त हो सकता है।

11 में से नौ जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी

यह खुलासा कारागार मुख्यालय द्वारा नदीम उद्दीम को उपलब्ध कराई सूचना से हुआ है। नदीम का कहना है कि उन्होंने राज्य की सभी जेलों में कैदियों की संख्या और जेलों की क्षमता के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसमें 11 जेलों की जानकारी मिली है। इनमें केवल दो जेलों को छोड़कर सभी नौ जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। इसमें भी 37 प्रतिशत ही सजायाफ्ता हैं, बाकी 63 प्रतिशत विचाराधीन कैदी बंद हैं। प्रदेश में सिर्फ संपूर्णानंद शिविर जेल, सितारगंज (खुली जेल) तथा जिला कारागार चमोली में क्षमता से कम कैदी हैं, बाकी में लगभग तीन गुना हैं।

जिला कारागार का नाम            क्षमता विचाराधीन          सजायाफ्ता कैदी

देहरादून                                    580 907                               369

हरिद्वार                                     888 684                              566

नैनीताल                                    71 117                                 10

अल्मोड़ा                                    102 183                                 40

चमोली                                     169 83                                   41

टिहरी                                     150 106                                  81

पौड़ी                                     150 98                                      69

हल्द्वानी                                     635 1310                               140

रुड़की                                     244 363                                   28

सम्पूर्णानंद शिविर, सितारगंज             300 0                                48

केंद्रीय कारागार सितारगंज             552 29                                    778

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *