यूसीसी लागू होने के बाद अब अगर कोई अपनी वसीयत करना चाहता तो यह काम तीन मिनट के वीडियो से भी हो जाएगा। इस वीडियो में अपनी वसीयत को पढ़कर बोलना होगा। इसमें दो गवाह भी बोलेंगे। इसके बाद इस वीडियो को अपलोड करना होगा। इसके अलावा, पोर्टल पर फॉर्म भरकर और हस्तलिखित व टाइप की हुई वसीयत को भी अपलोड किया जा सकता है।
कार्यकारी व उत्तरकाधिकारी- वसीयत करने वाले की मृत्यु होने के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र देकर वसीयत रजिस्टर करना और वसीयत की प्रति लेना।
आवेदक की मृत्यु होने पर- यदि कोई व्यक्ति वसीयत का आवेदन करता है और फैसला होने से पहले मृत्यु हो जाती है तो यह पंजीकृत वसीयत मानी जाएगी (यदि जांच सही हो)।
अपील का अधिकार
सब-रजिस्ट्रार/रजिस्ट्रार की अस्वीकृति होने पर- 30 दिन में रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार जनरल के पास ऑनलाइन अपील की जा सकती है। अपील ऑनलाइन पोर्टल या एप के माध्यम से कर सकते हैं।
ये हैं यूसीसी के कुछ प्रावधान
– पंजीकरण के आंकड़े सभी को उपलब्ध होंगे।
– निजी विवरण केवल सहमति से ही साझा हो सकेगा।
– पहली बार झूठी शिकायत पर चेतावनी, दूसरी व तीसरी बार में जुर्माना लगेगा।
– जुर्माने की वसूली 45 दिन में भुगतान अनिवार्य होगा, भूमि राजस्व से वसूली भी होगी।
– ऑनलाइन शिकायत का 45 दिन में निष्कर्ष निकलेगा।
– प्रमाणित कॉपी के लिए ऑनलाइन आवेदन, तय फीस, सीमित सूचना के लिए दोनों पक्षों की संयुक्त अर्जी की जरूरत होगी।
– लिवइन प्रमाणपत्र होने पर मकान मालिक शादी नहीं हुई कहकर इन्कार नहीं कर सकता।