देवभूमि में बेटियों की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर आज छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ताओं ने राजधानी देहरादून में उग्र प्रदर्शन किया। शनिवार को NSUI कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पर धरना दिया और प्रदेश की कानून व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सरकार और पुलिस प्रणाली पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों का मुख्य आक्रोश अंकिता भंडारी और एंजेल चकमा के मामलों में बरती जा रही कथित ढिलाई को लेकर था। NSUI पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन बेटियों को न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल रहा है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि एंजेल चकमा के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करने में ही 12 दिन का समय लगा दिया।
नारेबाजी और ज्ञापन
जिलाधिकारी कार्यालय के घेराव के दौरान छात्रों और कांग्रेस नेताओं ने वर्तमान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि रसूखदारों को बचाने के लिए जांच की गति को धीमा किया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी गईं:
अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल ‘वीआईपी’ चेहरे को बेनकाब कर सख्त सजा दी जाए। एंजेल चकमा मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो। दोनों ही मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर जल्द से जल्द दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।
न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
धरने पर बैठे छात्र नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि उत्तराखंड की बेटियों को जब तक न्याय नहीं मिल जाता, NSUI सड़कों पर उतरकर संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को आज तक पूर्ण इंसाफ न मिलना प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
इस दौरान बड़ी संख्या में NSUI के छात्र, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नागरिक समाज के लोग मौजूद रहे।
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