उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बैंकिंग इतिहास में एक बड़ा अध्याय जुड़ गया। ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ और सप्ताह में केवल 5 दिन काम (5-Day Working) की अपनी पुरानी मांग को लेकर बैंक कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। गांधी पार्क से शुरू होकर घंटाघर तक निकले इस विशाल जनसैलाब ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर गर्जना की। इस हड़ताल के चलते शहर के सभी बैंकों में तालाबंदी रही और करोड़ों का ट्रांजैक्शन ठप रहा।
महारथियों के नेतृत्व में एकजुट हुए कर्मचारी
यह विशाल आंदोलन बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय सचिव श्री प्रेम रंजन कुमार और UFBU के संयोजक श्री इंद्र सिंह रावत के प्रभावी मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस आंदोलन को धार देने के लिए बैंकिंग जगत के कई दिग्गज एक साथ मंच पर नजर आए, जिनमें शामिल रहे:
श्री हेमंत मल्होत्रा (प्रदेश सचिव, AIBOC उत्तराखंड यूनिट)
श्री प्रवीण (जोनल प्रेसिडेंट, BOB)
सुश्री मेघा दत्ता (सहायक क्षेत्रीय सचिव, BOB)
श्री अरविंद कुमार (क्षेत्रीय अध्यक्ष, BOB)
श्री प्रशांत मुट्ट (क्षेत्रीय चेयरमैन, BOB)
श्री आकाश कुमार (उपाध्यक्ष, BOB)
”मदद जनता की, चेतावनी सरकार को”
घंटाघर पर एकत्रित 450 से अधिक बैंक कर्मियों की भीड़ को संबोधित करते हुए नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मीडिया के माध्यम से जनता और सरकार को संदेश देते हुए कहा:
”हमारी इस हड़ताल का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना कतई नहीं है। जनता हमारी अपनी है, लेकिन यह कदम सरकार को ‘चेताने’ के लिए उठाया गया है। बैंक कर्मचारियों पर काम का बोझ इस कदर बढ़ गया है कि अब ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ के बिना काम करना असंभव है। सरकार को हमारी मांगों को गंभीरता से लेना ही होगा।”
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
ऐतिहासिक प्रदर्शन: गांधी पार्क से घंटाघर तक बैंक कर्मियों का ऐसा हुजूम देख राहगीर भी रुक गए।
पूर्ण कार्यबंदी: शहर के सभी छोटे-बड़े राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे, जिससे बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं।
5-डे वर्किंग की गूँज: सभी वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि बैंकिंग प्रणाली में सुधार के लिए सप्ताह में दो दिन का अवकाश अनिवार्य है।
नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रदर्शन के बाद भी सरकार की नींद नहीं खुली, तो भविष्य में बैंकिंग सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बाधित की जा सकती हैं।
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