अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के बाद गढ़वाल के साथ ही चीन और नेपाल सीमा तक फैली अल्मोड़ा संसदीय सीट पर भगवा लहराता रहा है। वर्ष 2009 के चुनावी अपवाद को छोड़ दें तो राम मंदिर आंदोलन के बीच वर्ष 1991 के बाद इस सीट पर अब तक हुए चुनाव में भाजपा का वर्चस्व रहा है। अब राम मंदिर का निर्माण हो चुका है। भाजपा इस मुद्दे को तो कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर चुनावी मैदान में है। इस सीट पर फिर से भगवा लहराएगा या कांग्रेस भाजपा के विजय पथ को रोकेगी, यह समय बताएगा।
अल्मोड़ा संसदीय सीट पर वर्ष 1980 के चुनाव में भाजपा के संस्थापकों में शामिल डॉ. मुरली मनोहर जोशी को कांग्रेस के दिग्गज हरीश रावत ने हराकर सबको चौंका दिया था। रावत ने अगले दो चुनाव (1984 और 1989) तक जीत का सिलसिला बरकरार रखा। 1991 में राम मंदिर आंदोलन के समय भाजपा ने इस सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व समाप्त किया। राम मंदिर आंदोलन के बीच जीवन शर्मा ने तीन बार के सांसद हरीश रावत को हराकर कांग्रेस के विजय पथ को रोका तो इसके बाद भाजपा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। नतीजतन, भाजपा के बची सिंह रावत के नाम लगातार चार बार सांसद बनने का रिकार्ड दर्ज हुआ। वर्ष 2009 में यह सीट आरक्षित हुई तो कांग्रेस के प्रदीप टम्टा ने अजय टम्टा को हराकर भाजपा को मिल रही लगातार जीत के सिलसिले को रोका।
2014 में हुए चुनाव में अजय ने प्रदीप को हराकर अपनी हार का बदला लेकर फिर से भगवा लहराया जो 2019 तक जारी रहा। चुनावी आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस सीट पर राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा का वर्चस्व रहा है। इस साल राम मंदिर का लोकार्पण हो चुका है और भाजपा इसे बढ़ी उपलब्धि बताते हुए मैदान में है। देखना होगा कि कांग्रेस राम मंदिर आंदोलन से चले आ रहे भाजपा के वर्चस्व को समाप्त करेगी या फिर से यह सीट भगवामय होगी।