उत्तराखंड देहरादून के डिफेंस कॉलोनी निवासी 14 वर्षीय अथर्व रैना ने बेहद कम उम्र में कार रेसिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कुवैत में महज 2 महीने की प्रशिक्षण अवधि के बाद अथर्व रैना ने कुवैत में कार रेसिंग में कई अवार्ड अपने नाम कर उत्तराखंड और और भारत का का नाम रोशन किया है।
देहरादून में जन्मे अथर्व रैना बचपन से ही रचनात्मक सोच रखने वाले रहे हैं। अथर्व के मुताबिक, बचपन में वह अपने पिता की कार के साथ प्रयोग किया करते थे। धीरे-धीरे उनका रुझान कार रेसिंग की ओर बढ़ता गया और उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना शुरू कर दिया।
खास बात यह है कि अथर्व रैना पारंपरिक रूप से स्कूल नहीं गए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने अनुभव और ऑनलाइन के माध्यम से कार रेसिंग से जुड़ी तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। वह छोटी उम्र में ही मिनी इंजन बनाने में भी सक्षम हैं। कारों की तकनीक और रेसिंग के प्रति उनका जुनून लगातार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
अथर्व ने बताया कि कुवैत में उन्होंने करीब दो महीने का प्रशिक्षण लिया और इसके बाद विभिन्न कार रेसिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पुरस्कार हासिल किए। वर्ष 2026 में अथर्व रैना आरएमसी चैंपियनशिप में भारत एवं उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उनका सपना और जुनून है कि वह भविष्य में कार रेसिंग की दुनिया में फॉर्मूला वन चैंपियन बनकर भारत एवं उत्तराखंड का नाम देश-दुनिया में रोशन करें l
अपनी सफलता का श्रेय अथर्व रैना अपनी मां भूमिका रैना और पिता कुणाल रैना को देते हैं। उनका कहना है कि माता-पिता ने हमेशा उनके सपने को समझा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। अथर्व का कहना है कि यदि वह पारंपरिक स्कूलिंग कर रहे होते तो शायद वह इस मुकाम तक इतनी जल्दी नहीं पहुंच पाते। स्कूल न जाने के बावजूद अथर्व फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं और बातचीत के दौरान अधिकांश समय अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करते हैं।
महज 14 वर्ष की उम्र में कार रेसिंग जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अथर्व की उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि यदि प्रतिभा को सही दिशा, प्रशिक्षण और परिवार का सहयोग मिले तो कम उम्र में भी बड़े सपनों को उड़ान दी जा सकती है।